UP Board syllabus Class 12
UP board Master chapter 6 Class 12 Long Questions Answer

BoardUP Board
Text bookNCERT
Class 12th
SubjectEnglish
Chapter Chapter 6
Chapter nameWOMEN’S EDUCATION
Chapter Number Number 6 Long Questions Answer
CategoryEnglish PROSE Class 12th
UP Board Syllabus Chapter 6 Class 12th English (Prose)
NumberChapter Number
1UP Board syllabus Chapter 6 Class 12th THE HORSE
2UP Board syllabus Chapter 6 Class 12th Summary of the Lesson
3UP Board syllabus Chapter 6 Class 12 Explanation
4UP Board syllabus chapter 6 Class 12 Comprehension
5UP board syllabus chapter 6 Class 12 Short Questions Answer
6UP board syllabus chapter 6 Class 12 Long Questions Answer
7UP board syllabus chapter 6 Class 12 FILL IN THE BLANKS

Q. Answer the following questions in about 150 words:

Q. 1. Describe S. Radhakrishnan’s views on true education.
एस. राधाकृष्णन के सच्ची शिक्षा पर विचारों का वर्णन कीजिए।

Or

What according to S. Radhakrishnan, is the main purpose of education?
एस राधाकृष्णन के अनुसार शिक्षा का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

Or

What is the chief purpose of education according to S. Radhakrishnan?
एस. राधाकृष्णान के अनुसार शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

Or

Wharkind of education does Dr. Radhakrishnan recommend and why?
डा. राधाकृष्णन किस प्रकार की शिक्षा की सिफारिश करते हैं और क्यों ?

Ans. Introduction

Ans. Introduction : Dr. S. Radhakrishnan was a great thinker, educationistand philosopher. He has described the past and present position of women in India, in
the field of education. He says that women have got a very wide scope today. They can enter the field of social work and public life.

Present education

Present education: Dr. Radhakrishnan presents in the essay the present position of women’s education. Their present education is not satisfactory. This type of
education is not true. The education that gives knowledge of the world and technical skill to earn a livelihood is not true education. True education should be broad and deep. It must have some kind of purpose in life. Without purpose our lives will become blind, blundering and bitter,

True education

True education: True education will give us discrimination. It should include the study of our classics. The stories in our classics will instil into us great moral
strength. We will know the proper conduct ultimately, true education will initiate us into a higher life into a world which transcends the world of Space and Time.

Conclusion

Conclusion: The writer suggests that attention should be paid to the education of women. In ancient times women studied the vedas and chanted gayatrijans. Compassion is the chief quality of women. Therefore, education should teacji us compassion.

भूमिका

भूमिका : डा. राधाकृष्णन एक महान विचारक, शिक्षाविद और दार्शनिक थे। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन एवं वर्तमान स्थिति का भारतीय स्त्रियों की दशा का वर्णन किया है। वे कहते हैं आज स्त्रियों ने विस्तृत क्षेत्र प्राप्त कर लिया है। वे सामाजिक कार्यों और सामान्य जीवन के क्षेत्र में प्रवेश कर सकती है।

वर्तमान शिक्षा

वर्तमान शिक्षा : डा राधाकृष्णन लेख में स्त्रियों की शिक्षा में वर्तमान स्थिति का वर्णन करते हैं उनकी वर्तमान शिक्षा सन्तोषजनक नहीं हैं। इस प्रकार की शिक्षा वास्तविक नहीं है। जो शिक्षा सासारिक शिक्षा देती है तथा आजीविका के लिए तकनीकी शिक्षा देती है, वास्तविक शिक्षा नहीं है। उनका जीवन में
कोई उद्देश्य होना चाहिए। निरुद्देश्य हमारा जीवन अन्धा, बुटिपूर्ण और कड़वा बन जायेगा।

यास्तविक शिक्षा

यास्तविक शिक्षा : वास्तविक शिक्षा हमें विवेक देगी। इसमें हमारे धर्म ग्रन्थ सम्मिलित होने चाहिए। धर्म ग्रन्थों की कहानियाँ हमारे भीतर नैतिक बल देंगी। हम उचित आचरण जानेंगे। अन्त में, वास्तविक शिक्षा हमें संसार के उच्चतर जीवन की ओर ले जाएगी जो हमें स्थान और समय की ओर अग्रसर करती

निष्कर्ष

निष्कर्ष : लेखक सलाह देते हैं कि स्त्रियों की शिक्षा की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। प्राचीन काल में स्त्रियों वेदो का अध्ययन करती थी तथा गायत्री मन्त्र का जाप करती थी। स्त्री का मुख्य गुण दया है। इसलिए, शिक्षा से हमें दया की शिक्षा मिलनी चाहिए।

Q.2. What part does women’s education play in building a nation?
स्त्री-शिक्षा की राष्ट्र निर्माण में क्या भूमिका है?

Or

State briefly the views of S. Radhakrishnan on women’s education?
स्त्री शिक्षा पर एस. राधाकृष्णन के विचार संक्षेप में लिखिए।

Ans. Introduction

Ans. Introduction: Dr. S. Radhakrishnan was a grear thinker and philosopher. He wrote about the education of women in frec India. Although he is talking about

women’s education

women’s education, some of his remarks are good for all education. In his essay on women’s education be has given importance to wonien’s education in building
anation.

Woman’s education

Woman’s education: In the beginning he says what kind of woman a society requires. He says that woman’s education should be more widespread. It should
be deep. It should give a purpose in life. We should recognize and encourage the Institutions that contribute to the education of girls.

Necessity of compassion

Necessity of compassion: The writer advises women to possess compassion which is a main characteristic of women’s character and personality, Womanhood
declined as there is a decline in compassion. Compassion is the natural quality without which you are not human.

Ancient times

Ancient times : In ancient times women were entitled to the study of the Vedas’ and to the chanting of the ‘gayatri japa’. He laments that women were neglected but fills them with hope with the statement that woman are now coming into their own.

भूमिका

भूमिका : डा. राधाकृष्णन एक महान विचारक और दार्शनिक थे। उन्होंने स्वतन्त्र भारत में स्त्री-शिक्षा के बारे में लिखा। यद्यपि वे स्त्री-शिक्षा को बात कर रहे है, उनकी कुछ टिप्पणियाँ समस्त शिक्षा के लिए अच्छी है। अपने लेख स्त्री-शिक्षा में उन्होंने राष्ट्र के निर्माण में स्त्री शिक्षा को महत्व दिया

स्त्री-शिक्षा

स्त्री-शिक्षा : प्रारम्भ में उन्होंने समाज में किस प्रकार की स्त्री चाहिए, के बारे में लिखा है। वे कहते है कि स्त्रियों के लिए शिक्षा विस्तृत फैलाव वाली होनी चाहिए । वह गहरी होनी चाहिए। इसे जीवन का कोई उदेश्य वेना चाहिए। जो संस्थाएँ लड़कियों को शिक्षा देती हैं उन्हें हमको मान्यता तथा उत्साहित
करना चाहिए।

दया की आवश्यकता

दया की आवश्यकता : लेखक सलाह देते हैं कि स्त्रियों में क्या होनी चाहिए जो कि स्त्री के चरित्र और व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता है। दया के हास से स्त्रीत्व का पतन हुआ है। दया एक प्राकृतिक गुण है, जिसके बिना हम मानब नहीं है।

प्राचीन काल

प्राचीन काल : प्राचीन काल में स्त्रियाँ पेड़ों का अध्ययन करने और गायत्री मन्त्र का जाप करने की अधिकारी थी। वे पश्चाताप करते है कि स्त्रियों को नकारा गया किन्तु यह कथन उनमें आशा का संचार करता है कि अब स्त्रियों अपने आपको पहचान रही है।

0.3. What advice does Dr. Radhakrishnan give to Indian women to acquire perfect knowledge ?
पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए डा. राधाकृष्णन भारतीय महिलाओं को क्या सलाह देते हैं?

Ane Introduction

Ane Introduction: Dr. Radhakrishnan was an educationist. He was not satisfied with the kind of education which is being imparted to the women in India. The
girl’s education must be deep as well as wide.

New kind of education

New kind of education: The writer says that the schools and colleges must be encouraged to impart true education to women. The role of the institutions is very
important. They inust be careful enough about making the education deep, broad and purposeful.

Education for higher values

Education for higher values : The education must inculcate higher values of Mife in women. It should enable to transcend the world of space and tine. For this
women should study the classics. Science, history and geography can give them the knowledge of this natural world of ours in which we live and gain the technical
skill foreaming livelihood. This education cannot be true education. This education can only fill our mind with information. So, it cannot be sublime one,

Study of classics

Study of classics : Our classics can be a good source of sublime education. They can shape their lives good and they can lead a life of nobility. By the study of
these holy books the qualities of self control, charity and compassion can be cultivated in them. These qualities are quite essential in life.

Conclusion

Conclusion: If our women are well educated, well cultured and well disciplined, if they possess restrained manners, they are expected to be good women and good mothers. They can help in building our nation great

भूमिका

भूमिका : डा. राधाकृष्णन एक शिक्षाविद थे। भारत में स्त्रियों को जो शिक्षा दी जा रही है। उससे वे सन्तुष्ट नहीं थे। लड़कियों की शिक्षा गहरी और विस्तृत होनी चाहिए।

नई प्रकार की शिक्षा

नई प्रकार की शिक्षा : स्त्रियों को वास्तविक शिक्षा देने के लिए संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। शिक्षण संस्थाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है उन्हें गम्भीर, विस्तृत और उद्देश्यपूर्ण शिक्षा देने के प्रति सावधान रहना चाहिए।

उच्चतर मूल्यों के लिए शिक्षा

उच्चतर मूल्यों के लिए शिक्षा : शिक्षा द्वारा स्त्रियों के जीवन में उच्चतर मूल्यों को समाहित किया जाना चाहिए। इसे अंतरिक्ष और समय की दुनियों में जाने योग्य बनाना चाहिए। इसके लिए स्त्रियों को धर्मग्रन्थों का अध्ययन करना चाहिए। विज्ञान, इतिहास तथा भूगोल हमारी प्राकृतिक दुनियाँ का ज्ञान दे
सकते हैं जिनसे हम आजीविका की तकनीकी चतुराई प्राप्त कर सकते हैं। यह शिक्षा वास्तविक शिक्षा नहीं हो सकती। यह शिक्षा केवल हमारे मस्तिष्क को सूचना से भर सकती है। अतः यह सर्वोच्च नहीं हो सकती।

धर्म ग्रन्थों का अध्ययन

धर्म ग्रन्थों का अध्ययन : हमारे धर्म ग्रन्थ उत्कृष्ट शिक्षा का साधन हो सकते हैं। वे उनके जीवन को अच्छा आकार दे सकते हैं और वे सज्जनता का जीवन बिता सकते हैं। इन पवित्र पुस्तकों के अध्ययन से आत्मसंयम, दान और दया के गुण रोपित किए जा सकते हैं। जीवन में ये गुण अति
आवश्यक है।

निष्कर्ष

निष्कर्ष-यदि हमारी स्त्रियाँ भली प्रकार से शिक्षित हैं, भली प्रकार से सुसंस्कृतिवाली हैं तथा भली प्रकार से अनुशासित हैं. यदि उनमें मर्यादित आचरण हैं, तो उनसे अच्छी माँ और अच्छी स्त्री होने की आशा की जाती है। वे हमारे राष्ट्र के निर्माण में सहायता कर सकती है

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