Class 12 Pedagogy Chapter 4 Indian Education during British Period

Class 12 Pedagogy Chapter 4 Indian Education during British Period

UP Board Master for Class 12 Pedagogy Chapter 4 Indian Education during British Period (ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा) are part of UP Board Master for Class 12 Pedagogy. Here we have given UP Board Master for Class 12 Pedagogy Chapter 4 Indian Education during British Period (ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा) .

BoardUP Board
TextbookNCERT
ClassClass 12
SubjectPedagogy
ChapterChapter 4
Chapter NameIndian Education during British Period (ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा)
Number of Questions Solved40
CategoryClass 12 Pedagogy

UP Board Master for Class 12 Pedagogy Chapter 4 Indian Education during British Period (ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
ब्रिटिशकालीन शिक्षा के आरम्भ एवं विकास का सविस्तार वर्णन कीजिए।
या
भारतीय शिक्षा के लिए वुड-डिस्पैच की सिफारिशों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
ब्रिटिशकालीन शिक्षा का आरम्भ व विकास भारत में आधुनिक शिक्षा का प्रारम्भ ब्रिटिश शासन काल में हुआ था। ईसाई मिशनरियों ने देश में आधुनिक शिक्षा की नींव डाली। उन्होंने शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य ईसाई धर्म का प्रचार और प्रसार रखा था, लेकिन ब्रिटिश काल में मैकाले के घोषणा-पत्र के बाद शिक्षा का व्यवस्थित रूप से विकास किया गया। ब्रिटिशकालीन शिक्षा 1947 ई० तक कायम रही। इसे स्वतन्त्रता से पूर्व शिक्षा का काल भी कहे। सकते हैं।
ब्रिटिशकालीन या आधुनिक भारतीय शिक्षा के विकास को निम्नलिखित शीर्षकों में रखा जा सकता
1. ईसाई मिशनरियों द्वारा शिक्षा का प्रसार-भारत में आधुनिक शिक्षा का प्रारम्भ ईसाई मिशनरियों द्वारा किया गया। वे समझते थे कि शिक्षा द्वारा लोग ईसाई धर्म को स्वीकार कर लेंगे। इसीलिए वे भारत में शिक्षा प्रचार के कार्य में लग गए। इस क्षेत्र में पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी, डेन एवं अंग्रेज धर्म-प्रचारकों ने प्रमुख कार्य किया। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने इस कार्य में अत्यधिक योगदान दिया। वे भारत में ईसाई प्रचारकों को कम्पनी के कर्मचारियों में धार्मिक भावना बनाए रखने तथा भारतीय लोगों को ईसाई बनाने के लिए भेजते थे। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए देश में अनेक स्थानों पर मिशनरी स्कूलों की स्थापना की गई।

2. भारतीय समाज-सुधारकों द्वारा शिक्षा का प्रसार-ईसाई मिशनरियों के साथ-साथ राजा राममोहन राय, स्वामी दयानन्द सरस्वती, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, राधाकान्त देव आदि समाज-सुधारकों ने शिक्षा के प्रचार और प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इस कार्य को पूरा करने के लिए उन्होंने जनता का सहयोग प्राप्त करके अनेक विद्यालयों की स्थापना की।

3. सन् 1798 का आज्ञा-पत्र-इस आज्ञा–पत्र के अनुसार कम्पनी ने अपने कर्मचारियों तथा सैनिकों को निःशुल्क शिक्षा देने के लिए अनेक विद्यालयों की स्थापना की। कम्पनी ने बम्बई (मुम्बई), मद्रास (चेन्नई) और बंगाल में अठारहवीं शताब्दी में बहुत-से विद्यालयों की स्थापना कर दी। अंग्रेजों की देखा-देखी हिन्दू तथा मुसलमानों ने भी अपने विद्यालय खोलने आरम्भ कर दिए।

4. सन 1813 का आज्ञा-पत्र-इस आज्ञा-पत्र ने भारतीय शिक्षा को ठोस और व्यवस्थित रूप प्रदान किया। ब्रिटिश संसद में यह प्रस्ताव रखा गया कि कम्पनी की सरकार भारतवासियों की शिक्षा में रुचि ले और इस कार्य के लिए धन व्यय करे। कम्पनी के संचालकों ने इस प्रस्ताव का बहुत विरोध किया, लेकिन ब्रिटिश संसद ने एक आज्ञा-पत्र पास कर दिया, जिसे सन् 1813 का आज्ञा-पत्र कहा जाता है। इसमें निम्नलिखित बातें थीं—

  • ईसाई पादरियों को भारत में धर्म-प्रचार के लिए छूट दे दी गई।
  • शिक्षा को कम्पनी का उत्तरदायित्व माना गया।
  • भारत में शिक्षा के प्रचार के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपए की धनराशि व्यय करने की अनुमति दे दी गई।

5. सन् 1814 का कम्पनी का आदेश-कम्पनी ने अपने प्रथम आदेश में शिक्षा की उन्नति, देशी , शिक्षा तथा प्राच्य भाषाओं की उन्नति, भारतीय विद्वानों को प्रोत्साहन व विज्ञान के प्रचार आदि पर ब्र दिया, परन्तु इस आदेश से कोई विशेष लाभ नहीं हुआ।

6. लॉर्ड मैकाले का विवरण-पन्न-सन् 1835 में लॉर्ड मैकाले ने एक विवरण-पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें शिक्षा सम्बन्धी निम्नलिखित सुझाव सम्मिलित थे

  • अंग्रेजी को ही शिक्षा का माध्यम बनाना चाहिए। ब्रिटिशकालीन शिक्षा का आरम्भ
  • अंग्रेजी पढ़ा-लिखा व्यक्ति ही विद्वान् माना जाए और साहित्य का अर्थ केवल अंग्रेजी साहित्य होना चाहिए।
  • विद्यार्थियों को रुझान फारसी और अरबी की अपेक्षा अंग्रेजी पर अधिक हो।
  • अनेक भारतीय भी अंग्रेजी भाषा को ही ज्ञान का भण्डार शिक्षा का प्रसार मान चुके हैं।

7. छनाई का सिद्धान्त-मैकाले के विवरण-पत्र ने शिक्षा के क्षेत्र में एक विवाद खड़ा कर दिया। इसी सन्दर्भ में छनाई का सन् 1814 का कम्पनी का सिद्धान्त सामने आया। इस सिद्धान्त के अनुसार यदि शिक्षा समाज में आदेश उच्च वर्ग को प्रदान की जाएगी तो वह उच्च वर्ग से निम्न वर्ग में स्वत: चली जाएगी। दूसरे शब्दों में, सरकार का कर्तव्य है कि वह केवल उच्च वर्ग के लिए शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करे, निम्न । वर्ग तो उसके सम्पर्क में आकर स्वयं शिक्षित हो जाएगा। आर्थर मैथ्यू के शब्दों में, “सर्वसाधारण में शिक्षा ऊपर से भारतीय शिक्षा आयोग या हण्टर छन-छन कर पहुँचती थी। बूंद-बूंद करके भारतीय जीवन के हिमालय से लाभदायक शिक्षा नीचे बहे, जिससे वह कुछ समय में चौड़ी और विशाल धारी में परिवर्तित होकर शुष्क मैदानों का सिंचन प्रचार करे।” इस सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक पाश्चात्यवादी थे।

ईसाई मिशनरियों ने भी इस सिद्धान्त का समर्थन किया। लॉर्ड मैकाले ने भी इस सिद्धान्त का प्रबल समर्थन करते हुए कहा, “हमें इस समय एक ऐसे वर्ग का निर्माण करने की चेष्टा करनी चाहिए जो हमारे और उन लाखों व्यक्तियों के मध्य जिन पर हम शासन करते हैं, दुभाषिए का कार्य करे।” इस सिद्धान्त को स्वीकार करके 1844 ई० में लॉर्ड हार्डिज ने घोषणा की कि “अंग्रेजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। इस घोषणा के बाद शिक्षा की प्रगति तीव्रता से हुई और स्थान-स्थान पर विद्यालयों की स्थापना होने लगी।

8. वुड की घोषणा-पत्र-सन् 1854 में चार्ल्स वुड ने शिक्षा सम्बन्धी एक घोषणा-पत्र बनाया। इस घोषणा-पत्र में शिक्षा सम्बन्धी निम्नलिखित प्रस्ताव रखे गए थे

  • भारतीय शिक्षा का उद्देश्य अंग्रेजी साहित्य और पाश्चात्य ज्ञान का प्रचार होना चाहिए।
  • भारत में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होना चाहिए।शिक्षा विभाग में शिक्षा सचिव एवं शिक्षा निरीक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए, जिससे विभाग का कार्य सुचारु रूप से चल सके।
  • समस्त व्यय बड़े विद्यालयों में ही नहीं खर्च करना चाहिए। भारतीयों को शिक्षा देने से वह अपने अन्य सम्बन्धियों को शिक्षा देने में समर्थ हो सकेंगे।
  • नए विद्यालयों की स्थापना की जाए, जिनमें शिक्षा को माध्यम भी भारतीय भाषाएँ हों।

9. थॉमस और स्टैनले के प्रयास-थॉमस और स्टैनले ने भी भारत में शिक्षा की उन्नति के लिए प्रयास किया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप तहसीलों एवं ग्रामों में भी हल्काबन्दी के विद्यालय खोले गए। इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षा के लिए प्रत्येक राज्य में विद्यालय स्थापित किए गए। इसके फलस्वरूप सभी प्रान्तों में निम्नलिखित शिक्षा संस्थाएँ हो गयीं

  • राजकीय शिक्षा संस्थाएँ,
  • मान्यता प्राप्त शिक्षा संस्थाएँ,
  • व्यक्तिगत शिक्षा संस्थाएँ।

10. भारतीय शिक्षा आयोग या हण्टर कमीशन (1882 ई०)-इस आयोग की नियुक्ति विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा पर विचार करने के लिए की गई थी, लेकिन उसने शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुझाव दिए। इस आयोग द्वारा प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा तक में सरकारी और व्यक्तिगत प्रयासों के मिश्रण
की बात की गई और भारतीयों को शिक्षा के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया गया। इस आयोग ने निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए-

  1. प्राथमिक शिक्षा का विकास करना आवश्यक है, क्योंकि वर्तमान स्थिति बहुत असन्तोषजनक है।
  2. जिला परिषद् एवं नगरपालिका को यह आदेश दिया जाए कि वे विद्यालयों के लिए एक निश्चित. संख्या में धन रखें।
  3. भारतीय भाषा एवं अंग्रेजी भाषा के विद्यालयों को अन्तर समाप्त किया जाए।
  4. प्राथमिक शिक्षा भारतीय भाषाओं में दी जाए।
  5. सरकारी विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। गैर-सरकारी विद्यालयों में प्रबन्धकों की इच्छानुसार धार्मिक शिक्षा की व्यवस्था की जा सकती है।
  6. स्त्री-शिक्षा की विशेष व्यवस्था की जाए।

11. स्वदेशी आन्दोलन एवं शिक्षा का प्रचार-उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना का प्रादुर्भाव हुआ। राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत समाज-सुधारकों का मत था कि भारतीय विद्यालयों में ही भारत के नवयुवकों का चारित्रिक निर्माण हो सकता है। देश में राष्ट्रीय भावना के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी भारतीयता लाने पर बल दे रहे थे। ब्रह्म समाज, आर्य समाज, थियोसोफिकल सोसायटी जैसी संस्थाएँ स्वदेशी भावना का प्रचार एवं प्रसार कर रही थीं; अतः स्वदेशी आन्दोलन के फलस्वरूप अनेक शिक्षा संस्थाओं की स्थापना की गई। इनमें दयानन्द वैदिक कॉलेज, लाहौर; सेण्ट्रल हिन्दू कॉलेज, बनारस; फग्र्युसन कॉलेज, पूना विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

12. भारतीय विश्वविद्यालय आयोग (1904 ई०)-लॉर्ड कर्जन ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के उद्देश्य से 1901 ई० में शिमला में एक शिक्षा सम्मेलन आयोजित करवाया। इस सम्मेलन के निर्णय के अनुसार भारतीय विश्वविद्यालय आयोग की नियुक्ति की गई। लॉर्ड कर्जन की नीति थी कि भारत में शिक्षा का अधिक-से-अधिक प्रचार और प्रसार हो। उसने गैर-सरकारी संस्थाओं को अनुदान देने की प्रथा का प्रचलन किया। इसके साथ ही उसने शिक्षा के विभिन्न स्तरों के विकास तथा प्रसार का भी प्रशंसनीय प्रयास किया।

13. राष्ट्रीय शिक्षा का विकास-लॉर्ड कर्जन की उग्र राष्ट्रीयता से सशंकित होकर तथा बंगाल के विभाजन को देखकर अनेक भारतीयों ने राष्ट्रीय शिक्षा के प्रचार और प्रसार में द्रुत गति से कार्य करना आरम्भ कर दिया। बंगाल में गुरुदास बनर्जी की अध्यक्षता में स्थापित समिति में बहुत-से ‘राष्ट्रीय हाईस्कूलों की स्थापना की। इसी समय कलकत्ते (कोलकाता) में नेशनल कॉलेज की स्थापना हुई। गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शान्ति निकेतन में एक ब्रह्मचर्य आश्रम खोला, जो आज विश्व भारती विश्वविद्यालय का रूप धारण कर चुका है। आर्य समाज ने गुरुकुलों की स्थापना करके प्राचीन वैदिक शिक्षा को प्रोत्साहन दिया।

14. गोपालकृष्ण गोखले का प्रस्ताव-मार्च, 1911 ई० में उदार दल के नेता गोपालकृष्ण गोखले ने केन्द्रीय व्यवस्थापिका सभा में प्राथमिक शिक्षा सम्बन्धी एक प्रस्ताव रखा, जो अस्वीकृत हो गया। इस प्रस्ताव की प्रमुख बातें निम्नलिखित थीं–

  • शिक्षा का पुनर्गठन होना चाहिए।
  • प्रत्येक प्रान्त प्राथमिक शिक्षा की एक योजना तैयार करे।
  • प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य एवं नि:शुल्क हो।
  • जिला बोर्ड एवं म्युनिसिपल बोर्डों को शिक्षा सम्बन्धी कार्य अवश्य करना चाहिए।

15. कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग-सन् 1917 ई० में सैडलर की अध्यक्षता में एक आयोग की नियुक्ति की गई, जिसका मूल उद्देश्य कलकत्ता विश्वविद्यालय के सम्बन्ध में अपने सुझाव देना तथा उच्च शिक्षा के सन्दर्भ में कुछ विचार प्रस्तुत करना था। इस आयोग ने देश के सभी विश्वविद्यालयों, माध्यमिक शिक्षा, स्त्री-शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए। इस आयोग ने अन्त:विश्वविद्यालय परिषद् की स्थापना का भी सुझाव दिया। आज का विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग उसी का विकसित रूप है।

16. हर्टाग समिति-सन् 1927 में श्री फिलिप हर्टाग ने प्राथमिक शिक्षा के सम्बन्ध में एक कमेटी नियुक्त की, जिसने निम्नलिखित सुझाव दिए-

  1. नए विद्यालयों को खोलने की अपेक्षा पुराने विद्यालयों का ही सुधार किया जाए।
  2. प्राथमिक शिक्षा नि:शुल्क एवं अनिवार्य होनी चाहिए।
  3. प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने की आयु 6 से 10 वर्ष निश्चित की गई।
  4. पाठ्यक्रम में सुधार किया जाए।
  5. निरीक्षण कार्य अधिकं कर दिया जाए तथा पढ़ाई का समय भी निश्चित किया जाए।

17. व्यावसायिक शिक्षा तथा वुड-एबट प्रतिवेदन-प्रथम विश्वयुद्ध के अनुभवों ने ब्रिटिश सरकार को इस बात को सोचने के लिए प्रेरित किया कि भारत में औद्योगिक शिक्षा का प्रचार और प्रसार होना चाहिए। इसी के फलस्वरूप सन् 1936-37 में श्री एबट और श्री वुड ने व्यावसायिक शिक्षा की समस्याओं पर विचार किया। इन्होंने भारत में व्यावसायिक शिक्षा के प्रचार एवं प्रसार के सम्बन्ध में व्यापक सुझाव दिए। इन्होंने सामान्य शिक्षा के सन्दर्भ में भी अनेक सुझाव प्रस्तुत किए, जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लागू किया गया।

18. बेसिक शिक्षा-या वर्धा योजना महात्मा गाँधी ने 1937 ई० में वर्धा में हुए एक शिक्षा सम्मेलन में बेसिक शिक्षा की एक योजना प्रतिपादित की। इसमें 7 से 10 वर्ष के बालक-बालिकाओं की नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था थी। बेसिक शिक्षा आज देश की राष्ट्रीय प्राथमिक शिक्षा बन गई है। श्री टी० एम० निगम के अनुसार, “बेसिक शिक्षा महात्मा गाँधी द्वारा दिया गया अन्तिम एवं सबसे अधिक मूल्यवान उपहार है। इस शिक्षा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी आधारभूत शिल्प को केन्द्र मानकर सम्पूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है।”

19. सार्जेण्ट योजना-सन् 1944 में भारतीय शिक्षा सलाहकार जॉन सार्जेण्ट को भारत में युद्धोत्तर शिक्षा विकास पर एक स्मृति-पत्र तैयार करने का आदेश दिया गया। उन्होंने शिक्षा के विभिन्न स्तर और विभिन्न पक्षों के सम्बन्ध में व्यापक सुझाव दिए, जिनमें से प्रमुख सुझाव निम्नलिखित थे

  1. तीन से छह वर्ष के बालकों के लिए नर्सरी विद्यालयों की स्थापना की जाए और यह शिक्षा निःशुल्क हो।
  2. छह से चौदह वर्ष के बालकों की शिक्षा बेसिक शिक्षा के सिद्धान्तों के आधार पर की जाए।
  3. हाईस्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम को साहित्यिक और औद्योगिक दो भागों में बाँटा जाए।
  4. बी० ए० का पाठ्यक्रम तीन वर्ष का हो।

इस प्रकार स्वतन्त्रता से पूर्व इन सुझावों को लागू करने का प्रयास किया गया, किन्तु ब्रिटिश सरकार के पैर अब भारत की पृथ्वी पर लड़खड़ा रहे थे। भारत-विभाजन सम्बन्धी समस्या के कारण शिक्षा सम्बन्धी सुझावों के प्रति लोगों का ध्यान न रहा और स्वतन्त्रता-प्राप्ति तक शिक्षा के क्षेत्र में कोई महत्त्वपूर्ण सुधार ने हो सका।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
हमारे देश में आधुनिक शिक्षा के आरम्भ होने में ईसाई मिशनरियों की क्या भूमिका थी?
उत्तर
पन्द्रहवीं शताब्दी में यूरोप से अनेक व्यापारिक कम्पनियाँ भारत में व्यापार के लिए आने लगी थीं। इनके साथ-ही-साथ यूरोप की अनेक ईसाई मिशनरियों का भी भारत में आगमन होने लगा। इन ईसाई मिशनरियों का भारत आगमन का मुख्यतया उद्देश्य तो ईसाई धर्म का प्रचार एवं प्रसार करना था परन्तु इस मुख्य उद्देश्य की निश्चित एवं शीघ्र प्राप्ति के लिए इन ईसाई मिशनरियों ने शिक्षा की व्यवस्था को एक प्रबल साधन के रूप में इस्तेमाल करना प्रारम्भ कर दिया। इन ईसाई मिशनरियों ने भारतीय जनता से प्रत्यक्ष सम्पर्क स्थापित करने के लिए तथा अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए देश के विभिन्न भागों में शिक्षण संस्थाएँ स्थापित करना प्रारम्भ कर दिया।

इन शिक्षण संस्थाओं में सामान्य शिक्षा के साथ-ही-साथ ईसाई धर्म के प्रचार एवं प्रसार का कार्य भी किया जाने लगा। इन शिक्षण संस्थाओं में मिशनरियों द्वारा शिक्षा के पाश्चात्य प्रारूप को अपनाया गया। इस प्रयास से हमारे देश में आधुनिक शिक्षा का सूत्रपात हुआ। इस तथ्य को ही ध्यान में रखते हुए विभिन्न विद्वान ईसाई मिशनरियों को ही भारत में आधुनिक शिक्षा का प्रवर्तक मानते हैं। स्पष्ट है कि हमारे देश में आधुनिक शिक्षा को आरम्भ करने में ईसाई मिशनरियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका तथा उल्लेखनीय योगदान है।

प्रश्न 2
ब्रिटिशकालीन शिक्षा के सन्दर्भ में लॉर्ड मैकाले के विवरण-पत्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
सन् 1835 में लॉर्ड मैकाले ने एक विवरण-पत्र प्रस्तुत किया, इस विवरण-पत्र के माध्यम से मैकाले ने भारतीय शिक्षा में अंग्रेजी की प्राथमिकता प्रदान करने की प्रबल सिफारिश की थी। इस सन्दर्भ में उसने भारतीय भाषाओं और साहित्य को अनुपयोगी तथा निरर्थक बताया। उसका कहना था, एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अलमारी को भारत और अरब के सम्पूर्ण साहित्य से कम महत्त्व नहीं है। इस प्रकार के पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण से मैकाले ने भारतीय शिक्षा के लिए निम्नलिखित सिफारिशें या सुझाव प्रस्तुत किये

  1. अंग्रेजी को ही शिक्षा का माध्यम बनाना चाहिए।
  2. अंग्रेजी पढ़े-लिखे व्यक्ति को विद्वान् माना जाए और साहित्य का अर्थ केवल अंग्रेजी साहित्य ‘ होना चाहिए।
  3. विद्यार्थियों का रुझान फारसी और अरबी की अपेक्षा अंग्रेजी पर अधिक हो।
  4. अनेक भारतीय अंग्रेजी भाषा को ही ज्ञान का भण्डार मान चुके हैं।
  5. मैकाले ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीयों को अंग्रेजी की शिक्षा प्रदान करके, उन्हें अंग्रेजी का अच्छा विद्वान बनाना सम्भव है; अतः इस दिशा में समुचित प्रयास अवश्य किये जाने चाहिए।
  6. मैकाले ने अंग्रेजों के स्वार्थ को भी विशेष महत्व दिया तथा इस दृष्टिकोण से भी एक तर्क प्रस्तुत किया, “अंग्रेजी की शिक्षा द्वारा इस देश में एवं ऐसे वर्ग का निर्माण किया जा सकता है जो रक्त और रंग से भले ही भारतीय हो परन्तु रुचियों, विचारों, नैतिकता और विद्वता से अंग्रेज होगा।

लॉर्ड मैकाले द्वारा प्रस्तुत किया गया ‘‘विवरण-पत्र’ तत्कालीन गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक द्वारा स्वीकार कर लिया गया तथा सरकार ने 7 मार्च, 1835 में एक विज्ञप्ति जारी करके भारत में अंग्रेजी शिक्षा को लागू कर दिया। इस निर्देश के बाद ब्रिटिशकालीन भारतीय शिक्षा का आगामी स्वरूप निश्चित हो गया। इस तथ्य को टी० एन० सिक्वेस ने इन शब्दों में स्पष्ट किया था, “इस विज्ञप्ति ने भारत में शिक्षा के इतिहास को एक नया मोड़ दिया। यह उस दिशा के विषयँ में, जो सरकार सार्वजनिक शिक्षा को देना चाहती थी, निश्चित नीति की प्रथम सरकारी घोषणा की थी।

प्रश्न 3
टिप्पणी लिखिए-वुड का घोषणा-पत्र
उत्तर
सन् 1854 में चार्ल्स वुड्ने शिक्षा सम्बन्धी एक घोषणा-पत्र बनाया। इस घोषणा-पत्र में शिक्षा सम्बन्धी निम्नलिखित प्रस्ताव रखे गए थे

  1. भारतीय शिक्षा का उद्देश्य अंग्रेजी साहित्य और पाश्चात्य ज्ञान का प्रचार होना चाहिए।
  2. भारत में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होना चाहिए।
  3. शिक्षा विभाग में शिक्षा सचिव एवं शिक्षा-निरीक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए, जिससे विभाग | का कार्य सुचारु रूप से चल सके।
  4. समस्त व्यय बड़े विद्यालयों में ही नहीं खर्च करना चाहिए। भारतीयों को शिक्षा देने से वह अपनेb अन्य सम्बन्धियों को शिक्षा देने में समर्थ हो सकेंगे।
  5. नए विद्यालयों की स्थापना की जाए, जिनमें शिक्षा का माध्यम भी भारतीय भाषाएँ हों।
  6. “वुड के घोषणा-पत्र में जन-सामान्य की शिक्षा को प्राथमिकता दी गई थी। इस योजना को
    सफल बनाने के लिए इस घोषणा-पत्र में शिक्षा संस्थाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए सहायता अनुदान प्रणाली को लागू करने की सिफारिश की गई थी। इस योजना के अन्तर्गत शिक्षा-संस्थाओं के भवन निर्माण के लिए, पुस्तकालयों के लिए, अध्यापकों के वेतन के लिए तथा छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्तियों के लिए अलग-अलग अनुदान की सिफारिश की गई थी।

उपर्युक्त वर्णित्न सिफारिशों के कारण वुड के घोषणा-पत्र को विशेष महत्त्वपूर्ण माना जाता है। कुछ विद्वानों ने तो इसे भारतीय शिक्षा का ‘महाधिकार-पत्र’ (Magnakarta) की संज्ञा दी है।

प्रश्न 4
ब्रिटिशकालीन शिक्षा के मुख्य गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
भारत में ब्रिटिशकालीन शिक्षा के प्रमुख गुण निम्नलिखित थे

  1. इस शिक्षा के अन्तर्गत भारतीय पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान के सम्पर्क में आए और उनका वैज्ञानिक, | राजनीतिक तथा औद्योगिक क्षेत्र में ज्ञान विकसित हुआ।
  2. अंग्रेज भारतीय सभ्यता और संस्कृति से बहुत प्रभावित थे। अत: उन्होंने प्राचीन भारतीय ग्रन्थों का अंग्रेजी में अनुवाद कराया और उनका अध्ययन किया। इसके फलस्वरूप भारतीयों को भी अपनी | प्राचीन संस्कृति के गौरव का ज्ञान हुआ और उनमें राजनीतिक चेतना का जन्म हुआ।
  3. इस शिक्षा के अन्तर्गत भारत की प्रान्तीय भाषाओं का समुचित विकास हुआ।
  4. ब्रिटिशकालीन शिक्षा ने भारतीयों के अन्धविश्वास और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  5. अंग्रेजों ने स्त्री-शिक्षा के विकास के लिए काफी प्रयास किए, फलस्वरूप देश में स्त्रियों की दशा | में विशेष सुधार आया।
  6. अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीयों में राजनीतिक पुनर्जागरण किया, फलस्वरूप भारतीय ब्रिटिश दासता से
    मुक्त होने में सफल हो सके।
  7. ब्रिटिश काल में शिक्षा के प्रचार व प्रसार के अनेकानेक साधनों का भी विकास हुआ।
  8. ब्रिटिश शिक्षा के कारण विश्व की विभिन्न देशों की सभ्यताओं और संस्कृतियों का भारतीयों को
    ज्ञान प्राप्त हुआ।

प्रश्न 5
ब्रिटिशकालीन शिक्षा के मुख्य दोषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
ब्रिटिशकालीन शिक्षा के प्रमुख मेषों का विवेचन निम्नलिखित है-

  1. अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया गया, फलस्वरूप भारतीय भाषाओं का समुचित विकास ने हो सका।
  2. ब्रिटिशकालीन शिक्षा ने भारतीयों को पाश्चात्य संस्कृति के रंग में रँग दिया। वे अपनी संस्कृति को भूलकर भौतिकता के सागर में डूज़ गए।
  3. इस शिक्षा ने समाज में ‘बाबू वर्ग नामक एक नए वर्ग को जन्म दिया था। इस वर्ग ने ब्रिटिश सरकार को सहयोग देकर राष्ट्रीय हितों पर कुठाराघात किया।
  4. ब्रिटिश शिक्षा ने भारतीयों को अधार्मिक, अनैतिक तथा भौतिकवादी बना दिया तथा उन्हें प्राचीन भारतीय आध्यात्मिकता के महत्त्व का ज्ञान न रहा।
  5. ब्रिटिश शिक्षा ने जनसाधारण की शिक्षा की पूर्ण उपेक्षा की और देश में निरक्षरता का बोलबाला ही रहा।।
  6. ब्रिटिशकालीन शिक्षा भारतीय हितों के प्रतिकूल रही। इस शिक्षा का मूल उद्देश्य भारत में अंग्रेजी शासन को स्थायी और सुदृढ़ बनाना ही था।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
लॉर्ड मैकाले द्वारा प्रतिपादित निस्यन्दन सिद्धान्त का सामान्य विवरण संक्षेप में लिखिए।
उत्तर
लॉर्ड मैकाले ने भारत में शिक्षा की व्यवस्था के विषय में एक विवरण-पत्र प्रस्तुत किया था, जिसके आधार पर शिक्षा के क्षेत्र में पूर्व-पश्चिम सम्बन्धी विवाद उठ खड़ा हुआ। इसी सन्दर्भ में मैकाले ने निस्यन्दन सिद्धान्त प्रस्तुत किया। इस सिद्धान्त की मान्यता के अनुसार, यदि समाज के उच्च वर्ग को समुचित शिक्षा प्रदान कर दी जाए तो उस स्थिति में शिक्षा उच्च वर्ग से स्वतः ही निम्न वर्ग तक पहुँच जाएगी। इस तथ्य को आर्थर मैथ्यू ने इन शब्दों में स्पष्ट किया है, “सर्वसाधारण में शिक्षा ऊपर से छन-छन कर पहुँचानी थी। बूंद-बूंद करके भारतीय जीवन के हिमालय से लाभदायक शिक्षा नीचे बहे, जिससे वह कुछ समय में चौड़ी और विशाल धारा में परिवर्तित होकर शुष्क मैदानों का सिंचन करे।” मैकाले के निस्यन्दन सिद्धान्त के अनुसार सरकार का दायित्व केवल उच्च वर्ग को शिक्षित करना था तथा निम्न वर्ग स्वत: ही उच्च वर्ग के सम्पर्क में आकर क्रमशः शिक्षित हो जाएगा।

प्रश्न 2
टिप्पणी लिखिए-भारतीय शिक्षा आयोग या हण्टर कमीशन।
उत्तर
भारतीय शिक्षा आयोग या हण्टर कमीशन की नियुक्ति विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा पर विचार करने के लिए की गई थी, लेकिन उसने शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुझाव दिए। इस आयोग द्वारा प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा तक में सरकारी और व्यक्तिगत प्रयासों के मिश्रण की बात की गई और भारतीयों को शिक्षा के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया गया। इस आयोग ने निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए.

  1. प्राथमिक शिक्षा का विकास करना आवश्यक है, क्योंकि वर्तमान स्थिति बहुत असन्तोषजनक है।
  2. जिला परिषद् एवं नगरपालिका को यह आदेश दिया दिया जाए कि वे विद्यालयों के लिए एक निश्चित संख्या में धन रखें।।
  3. भारतीय भाषा एवं अंग्रेजी भाषा के विद्यालयों को अन्तर समाप्त किया जाए।
  4. प्राथमिक शिक्षा भारतीय भाषाओं में दी जाए।
  5. सरकारी विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। गैर-सरकारी विद्यालयों में प्रबन्धकों की इच्छानुसार धार्मिक शिक्षा की व्यवस्था की जा सकती है।
  6. स्त्री-शिक्षा की विशेष व्यवस्था की जाए।

प्रश्न 3
भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लॉर्ड मैकाले का तटस्थ मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर
भारत में आधुनिक शिक्षा-व्यवस्था स्थापित करने में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका लॉर्ड मैकाले की रही है। लॉर्ड मैकाले प्रशंसा एवं निन्दा दोनों के ही पात्र रहे हैं। लॉर्ड मैकाले के प्रशंसक उन्हें आधुनिक भारतीय शिक्षा के पथ-प्रदर्शक स्वीकार करते हैं। उनके अनुसार मैकाले द्वारा की गई। शिक्षा-व्यवस्था के ही परिणामस्वरूप भारतीय जनता उन्नति एवं प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हुई। इसके विपरीत लॉर्ड मैकाले के चिन्दकों का कहना है कि मैकाले ने अपनी शैक्षिक नीतियों के माध्यम से भारतीय जनता का घोर अहित किया है। मैकाले ने भारतीय जनता को मानसिक रूप से गुलाम बना दिया। उसके द्वारा की गई अंग्रेजी शिक्षा की व्यवस्था से भारतीय संस्कृति को गहरी ठेस पहुँची। भारतीय भाषाओं का विकास रुक गया तथा एक अलग से ‘बाबू वर्ग का प्रादुर्भाव हुआ।

निश्चित उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न1
भारत में आधुनिक शिक्षा-प्रणाली को आरम्भ करने के लिए सर्वप्रथम किन संस्थाओं द्वारा सफल प्रयास किए गए?
उत्तर
भारत में आधुनिक शिक्षा-प्रणाली को आरम्भ करने के लिए सर्वप्रथम ईसाई मिशनरियों द्वारा सफल प्रयास किए गए।

प्रश्न 2
भारत में आधुनिक शिक्षा का सूत्रपात किस शासनकाल में हुआ?
उत्तर
भारत में आधुनिक शिक्षा का सूत्रपात मुख्य रूप से अंग्रेजों के शासनकाल में हुआ।

प्रश्न 3
ईसाई मिशनरियों के अतिरिक्त किन भारतीय समाज-सुधारकों ने देश में आधुनिक शिक्षा के विकास में योगदान प्रदान किया?
उत्तर
आधुनिक शिक्षा को आरम्भ करने में राजा राममोहन राय, स्वामी दयानन्द सरस्वती, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, गोपालकृष्ण गोखले, सर सैयद अहमद खाँ आदि समाज-सुधारकों ने उल्लेखनीय योगदान प्रदान किया।

प्रश्न 4
लॉर्ड मैकाले द्वारा प्रतिपादित शिक्षा सम्बन्धी सिद्धान्त को किस नाम से जाना जाता
उत्तर
लॉर्ड मैकाले द्वारा प्रतिपादित शिक्षा सम्बन्धी सिद्धान्त को निस्यन्दन सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 5
‘छनाई के सिद्धान्त का सुझाव किसने दिया था ?
उत्तर
छनाई के सिद्धान्त’ का सुझाव लॉर्ड मैकाले ने दिया था।

प्रश्न 6
आधुनिक भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में लॉर्ड कर्जन के योगदान को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
आधुनिक भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में लॉर्ड कर्जन ने संख्यात्मक एवं गुणात्मक विकास के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए।

प्रश्न 7
1854 की शिक्षा नीति की घोषणा किसने की ?
उत्तर
चार्ल्स वुड ने।

प्रश्न 8
किस अभिलेख को अंग्रेजी शिक्षा का महाधिकार पत्र’ के नाम से जाना जाता है?
उत्तर
‘वुड के घोषणा-पत्र’ को अंग्रेजी शिक्षा का महाधिकार पत्र के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 9
शिक्षा में सहायता अनुदान प्रणाली की घोषणा किसने की थी?
उत्तर
शिक्षा में सहायता अनुदान प्रणाली’ की घोषणा चार्ल्स वुड ने सन् 1854 के घोषणा-पत्र में की थी।

प्रश्न 10
भारतीय शिक्षा आयोग या हण्टर कमीशन का गठन कब तथा किसलिए किया गया था?
उत्तर
भारतीय शिक्षा आयोग या हण्टर कमीशन का गठन सन् 1882 ई० में किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा-व्यवस्था पर विचार करना था।

प्रश्न 11
स्वदेशी आन्दोलन के अन्तर्गत मुख्य रूप से कौन-कौन-से कॉलेज स्थापित किए गए थे?
उत्तर
स्वदेशी आन्दोलन के अन्तर्गत स्थापित किए गए मुख्य कॉलेज थे—दयानन्द वैदिक कॉलेज-लाहौर, सेण्ट्रल हिन्दू कॉलेज–बनारस, फग्र्युसन कॉलेज-पूना।

प्रश्न 12
कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग किस सन में गठित किया गया तथा इसका अध्यक्ष कौन था?
उत्तर
कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग 1917 ई० में गठित किया गया तथा इसका अध्यक्ष माइकेल सैडलर था।

प्रश्न 13
सार्जेण्टे योजना के अन्तर्गत छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए मुख्य रूप से क्या सुझाव दिया गया था?
उत्तर
सार्जेण्ट योजना के अन्तर्गत सुझाव दिया गया कि 3 से 6 वर्ष के बालकों के लिए नर्सरी विद्यालय स्थापित किए जाएँ तथा यह शिक्षा नि:शुल्क हो।

प्रश्न 14
निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य

  1. भारत में आधुनिक शिक्षा को आरम्भ करने में ईसाई मिशनरियों का कोई योगदान नहीं था।
  2. सन् 1813 के आज्ञा-पत्र में भारत में शिक्षा को कम्पनी का उत्तरदायित्व माना गया।
  3. लॉर्ड मैकाले के अनुसार समाज के उच्च एवं निम्न दोनों ही वर्गों के लिए शिक्षा की समान व्यवस्था की जानी चाहिए।
  4. लॉर्ड कर्जन ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के उद्देश्य से सन् 1901 में शिमला में एक शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया था।
  5. भारत में औद्योगिक शिक्षा की व्यवस्था का सुझाव वुड-एबट प्रतिवेदन में दिया गया था।

उत्तर

  1. असत्य,
  2. सत्य,
  3. असत्य,
  4. सत्य,
  5. सत्य

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव कीजिए-
प्रश्न 1
भारत में आने वाला प्रथम यूरोपियन था
(क) अंग्रेज
(ख) डच
(ग) पुर्तगाली
(घ) फ्रांसीसी
उत्तर
(ग) पुर्तगाली

प्रश्न 2
वास्कोडिगामा कालीकट के बन्दरगाह पर कब उतरा?
(क) अप्रैल, 1492 ई०
(ख) मई, 1498 ई०
(ग) दिसम्बर, 1599 ई०
(घ) जून, 1613 ई०
उत्तर
(ख) मई, 1498 ई०

प्रश्न 3
यूरोपियनों के आगमन के समय भारत की देशी शिक्षा की क्या दशा थी?
(क) सामान्य
(ख) उच्चतर
(ग) उन्नतशील
(घ) दयनीय
उत्तर
(घ) दयनीय

प्रश्न 4
वारेन हेस्टिग्स ने कलकत्ता दरसा की स्थापना कब की?
(क) 1685 ई०
(ख) 1774 ई०
(ग) 1780 ई०
(घ) 1791 ई०
उत्तर
(ग) 1780 ई०

प्रश्न 5
कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज का संस्थापक कौन था?
(क) वारेन हेस्टिग्स
(ख) लॉर्ड वेलेजली
(ग) लॉर्ड विलियम बैंटिंक
(घ) लॉर्ड डलहौजी
उत्तर
(ख) लॉर्ड वेलेजली

प्रश्न 6
ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत में शिक्षा प्रसार हेतु कब से अनुदान देना आरम्भ किया?
(क) 1798 ई०
(ख) 1813 ई०
(ग) 1833 ई०
(घ) 1853 ई०
उत्तर
(ख) 1813 ई०

प्रश्न 7
भारत में अंग्रेजी शिक्षा का आरम्भ हुआ था
(क) लॉर्ड कर्जन द्वारा।
(ख) लॉर्ड ऑकलैण्ड द्वारा।
(ग) लॉर्ड मैकाले द्वारा
(घ) विलियम हण्टर द्वारा
उत्तर
(ग) लॉर्ड मैकाले द्वारा

प्रश्न 8
“एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की अलमारी भारत और अरबी के सम्पूर्ण देशी साहित्य के बराबर होगी।” यह कथन किसका है?
क) लॉर्ड विलियम बैंटिंक
(ख) लॉर्ड आर्कलैण्ड
(ग) लॉर्ड मैकाले
(घ) लॉर्ड कर्जन
उत्तर
(ग) लॉर्ड मैकाले

प्रश्न 9
ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा का माध्यम था
(क) हिन्दी,
(ख) अंग्रेजी
(ग) फारसी
(घ) संस्कृत
उत्तर
(ख) अंग्रेजी

प्रश्न 10
चार्ल्स वुड का शिक्षा घोषणा-पत्र कब प्रकाशित हुआ?
(क) 1813 ई०
(ख) 1835 ई०
(ग) 1854 ई०
(घ) 1882 ई०
उत्तर
(ग) 1854 ई०

प्रश्न 11
अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा किसे कहा जाता है?
(क) ऑकलैण्ड का विवरण-पत्रे
(ख) लॉर्ड मैकाले का विवरण-पत्र
(ग) वुड का विवरण-पत्र ।
(घ) हण्टर कमीशन की रिपोर्ट
उत्तर
(ग) वुड का विवरण-पत्र

प्रश्न 12
भारत में आधुनिक विश्वविद्यालय की स्थापना का सुझाव दिया गया था
(क) 1813 के आज्ञा-पत्र द्वारा
(ख) 1833 के आज्ञा-पत्र द्वारा
(ग) 1837 के मैकाले के विवरण-पत्र द्वारा।
(घ) 1854 के वुड के घोषणा-पत्र द्वारा
उत्तर
(घ) 1854 के वुड के घोषणा-पत्र द्वारा

प्रश्न 13
भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम किसने पारित करवाया?
(क) लॉर्ड डलहौजी
(ख) लॉर्ड लिटन
(ग) लॉर्ड रिपन :
(घ) लॉर्ड कर्जन
उत्तर
(घ) लॉर्ड कर्जन

प्रश्न 14
भारत में प्राथमिक शिक्षा के विकास और समस्याओं पर विचार करने वाला पहला आयोग था
(क) सैडलर आयोग।
(ख) हण्टर आयोग
(ग) सार्जेण्ट आयोग ।
(घ) हर्टाग समिति
उत्तर
(ख) हण्टर आयोग

प्रश्न 15
भारत में पहला विश्वविद्यालय कहाँ पर खोला गया था?
(क) कोलकाता
(ख) बनारस
(ग) आगरा
(घ) मुम्बई
उत्तर
(क) कोलकाता

प्रश्न 16
भारत में केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की स्थापना कब हुई?
(क) 1932 ई०
(ख) 1935 ई०
(ग) 1940 ई०
(घ) 1944 ई०
उत्तर
(ख) 1935 ई०

प्रश्न 17
भारतीय स्कूलों के लिए सहायता अनुदान प्रणाली कब प्रारम्भ हुई?
(क) 1814 ई० में
(ख) 1834 ई० में
(ग) 1854 ई० में ।
(घ) 1864 ई० में
उत्तर
(ग) 1854 ई० में

We hope the UP Board Master for Class 12 Pedagogy Chapter  4 Indian Education during British Period (ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा) help you. If you have any query regarding UP Board Master for Class 12 Pedagogy Chapter 4 Indian Education during British Period (ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा) , drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP board Master for class 12 Pedagogy chapter list – Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published.

Scroll to Top